वृषपर्वा तमाज्ञाय प्रत्यनीकविवक्षितम् । गुरुं प्रसादयन् मूर्ध्ना पादयो: पतित: पथि ॥ “राजा वृषपर्वा समझ गया कि शुक्राचार्य उसे प्रताड़ित करने या शाप देने आ रहे हैं। फलस्वरूप, इसके पूर्व कि शुक्राचार्य उसके महल में आयें, वृषपर्वा बाहर आ गया और मार्ग में ही अपने गुरु के चरणों प...
जय जय श्री कृष्ण-चैतन्य गौरचन्द्र। जयाद्वैतचन्द्र जय जय नित्यानन्द॥ “श्री कृष्णचैतन्य महाप्रभु की जय हो! श्री अद्वैतचन्द्र की जय हो! श्री नित्यानन्द प्रभु की जय हो!” जय जय गदाधर जय श्रीनिवास।जय मुकुन्द वासुदेव जय हरिदास॥ “गदाधर प्रभु की जय हो! श्रीवास ठाकुर की...
गुरु-तत्त्व १. a) गुरु भागवत-कृपा-मूर्ति अर्थात भगवद् कृपा के साक्षात स्वरूप होते हैं। b) एक प्रमाणिक गुरु मूर्तिमान कृष्णप्रसाद होते हैं अर्थात श्रीकृष्ण कृपा के साक्षात अवतार। c) एक प्रमाणिक गुरु कृष्ण-कृपा-श्री-मूर्ति अर्थात श्रीकृष्ण की करुणा का साक्षात अवतार हैं। २. एक प्रमाणिक गुरु स्वरू...
कार्तिक मास में परदत्त दीप उद्बोधित करने का महात्म्य (श्रील सनातन गोस्वामी कृत हरि भक्ति विलास, सोलहवाँ विलास से उद्धृत) श्लोक 126 बोधनात् परदीपस्य वैष्णवानांच सेवनात्। कार्त्तिके फलमाप्नोति राजसूयाश्वमेधयोः॥ कार्तिक मास में परदत्त दीप उद्दीपित करने से एवं वैष्णव वृंद की सुश्रुषा करने से राज...
इस जगत में, चार प्रामाणिक वैष्णव सम्प्रदाय या सत्-सम्प्रदाय हैं: श्री ब्रह्म-रुद्र सनका वैष्णवाः क्षिति पावनाः। चत्वारस्ते कलौभाव्या हयुत्कले पुरुषोत्तमात्॥ श्री-सम्प्रदाय को रामानुजाचार्य-सम्प्रदाय भी कहते हैं, क्योंकि इस सम्प्रदाय के आचार्य श्रील रामानुजाचार्य हैं। इसी प्रकार, ब्रह्मा...
माता पिता युवतयस्तनया विभूतिः सर्वं यदेव नियमेन मदन्वयानाम्। आद्यस्य नः कुलपतेर्बकुलाभिरामं श्रीमत्तदङ्घ्रियुगलं प्रणमामि मूर्ध्ना॥ मैं हमारी भक्ति परंपरा के समस्त पूर्ववर्ती आचार्यों के पवित्र और धन्य चरण-कमलों में, जो नवविकसित बकुल-पुष्पों की भाँति मनोहर हैं, विनम्रता पूर्वक अपना प...
श्रीमद-भागवतम की महिमा कृष्ण भक्ति-रस-स्वरूप श्री-भागवत। ताते वेद-शास्त्र हैते परम महत्त्व॥ श्रीमद्भागवतम्, समस्त वेदों और उपनिषदों का सार है। यह कृष्ण-भक्ति-रस से युक्त है। यह ब्रह्म–सूत्र या वेदान्त–सूत्र की स्वाभाविक टीका है। वेदान्त–सूत्र का संकलन स्वयं श्रील व्या...
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